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घुसपैठ की राजनीति भारतीयों के ख़िलाफ़, पश्चिम बंगाल में घुसपैठ पर ही बवाल

Ravish Kumar Official25 views
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नमस्कार मैं रवीश कुमार अमेरिका और भारत में कई चीजें एक जैसी और साथ साथ हो रही हैं भारत में पश्चिम बंगाल में अवयद घुस्पैठीयों को निकालने को लेकर तरा तरा के बयान आने लगे हैं तो अमेरिका के टेकसस में भारतीयों के खलाब नफरती अभ पश्चिम बंगाल में घुस्पैठीयों को निकालने के लिए फाओरन डिटेंशन सेंटर जैसी कोई चीज बनाने की बात हो रही हैं।तो अमेरिका में भारत से घुसे अवयद प्रवासीयों को निकालने का अभियान चल रहा है।इस अभियान के कारण भारतीय मूल के लोग भगडर मच जा रही है।ग्रीन कार्ड को लेकर अमेरिका ने नया नियम बनाया कि अब जिसे इसके लिए आवेदन करना होगा वापस अपने देश जाना होगा और वहाँ से अपलाई करना होगा।इस एक नियम के कारण H -1B वीजा पर रह रहे है लाखो भारतियों के बारे म बाद में इस नीयम में कुछ संशोधन भी किया गया जिसके बारे में हम इस वीडियो में आगे बात करेंगे. कैलिफोर्निया के बे एरिया में भारतियों की आबादी 104 प्रतिशत की दर से बढ़ गई तो वहाँ सवाल उठने लगे हैं और भारत में मोधी सरकार ने खास जिलो सख्त किये जा रहे हैं ताकि अमेरिका मेंकाम के लिए कोई आसानी से ना आये आ जाये तो उनका बसना पहले की तरह आसान ना रहे हैं भारत में घुस्पैट का अभियान चल रहा है इस अभियान के पीछे मुसल्मानों को भी टार अमेरिका और पस्चिम बंगाल की खबरों को पलट कर देखेंगे लगेगा बंगाल टेकसेस में है और टेकसेस बंगाल में है अमेरिका में इलिगल इमिग्रेंट्स कहते हैं बंगाल में घुस्पैठिया कहा जा रहा है अमेरिका में भारत से बड़ी संख्या में लोग चोरी क इसलिए ऐसे बहुत से लोगों ने अवैद प्रवासीयों की राजनेती के खिलाब ट्रम्प को सपोर्ट किया और उन्हें वोट किया मगर अब कानूनी तरीके से आये और बस गए लोगों पर भी अमेरिका से निकाले जाने की तलवार लटकने लगी हैं वहाँ ऐसे भारतीयों भारत में घुस्पैठियों को निकालने वाला मेडिल क्लास खुद अमेरिका में जाकर बसना चाहता है, मगर अब उन्हें भी वहाँ घुस्पैठिया कहा जाने लगा है. आईरेनी इंटरनाशनल हो गई है, इंडिया में घुंगरू पहनकर नाच रही है, अमेरिका में सूट � ऐसी राजनीती से उसे अस्थिर असुरक्षित किया जाता है डराया जाता है कि घुस्पैट के नाम पर आपको टांग दिया जाएगा

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भारत में मुसल्मानों को इसी आधार पर टारगेट किया जाता है तो अमेरिका में भारतिय लोगों को किया जाने लगा है अमेरिका में हिंदू और मुसल्मान सभी मिलकर घुस्पैट की इस राजनिती क भारत में मुसल्मानों को लगने लगा है कि उनसे कभी भी आगज मांग दिया जाएगा नागरिक्ता साबित करने के लिए कह दिया जाएगा SIR में बड़ी संक्षा में मुसलिम वोटर के नाम काट दिये गए कटे तो हिंदू वोटर के भी मगर कोई उनमें घुस्पैठिया न अगर आप भारत में घुस्पैट और आबादी की राजनिती से जुड़ी खबरों को फॉलो कर रहे हैं, तो अमेरिका से आ रही खबरों को हिंदी में या किसी भाषा में बहुत आसानी से समझ जाएंगे।यह सैंप्रांसिस्को क्रोणिकल में च्ःपा लेक है लिखने वाले हैं लिंचियोंग, सारा रवाणी, श्री हर्षा, देबुला पल्ली।शुरुवात इस सवाल से होती है कि कैलिफोरनिया में रहने वाले लाखो भारतियों की तरक्की में सिलिकोन वैली और बे एरिया का ब� पिछले 40 -50 वर्षों में यह अंतर आया है कि यहां की आबादी का 30 प्रतिशत हिस्सा भारतीय और भारतीय मूल के लोगों का हो गया है।1980 में भारतीय और भारतीय मूल के लोगों की आबादी 18 ,000 थी, मगर 2024 में 4 लाग से अधिक हो गई।यहां के बे एरिया में जितने भारतीअमेरिका में कहीं और नहीं इस इलाके में चीन के लोगों की आबादी 30 प्रतिशट की दर से बड़ी है मगर भारतीयों की 104 फीसत की दर से धन दौलत के मामले में अमेरिकी लोगों के बाद यहां भारतीयों का ही स्थान है यहां के मेयर राज सलवान पंजाबी मूल के हैं और इसी इलाके के वोट के दम पर रोख हन्ना कॉंग्रेस में गए हैं अब यहां के लोग तरह तरह से असुरक्षित महसूस करने लगे हैं AI के कारण नौकरियां जाने का खत्रा तो ग्रीम कार्ड के नीम तो कभी H1B वीजा के उन वीडियो में भारतियों के परती नसली भेद भाव का अन्दाजा होता है सैं फ्रांसिस्को क्रॉणिकल के लेक में बताया गया है कि ओनलाइन हेट बहुत बढ़ गई है क्यों नफरत फैली है इन कारणों की पड़ताल की जानी चाहिए क्या भारती अमूल के लोगों की तर गुस्सा बढ़ रहा है, नफ्रत फैलाई जा रही है. सैं फ्रांसिसको क्रोनिकल में लिखा है कि वहाँ के सर्वे में पाया गया है कि दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाब नफ्रत बढ़ गई है. अमेरिका के विदेश सचीव मारको रूबियो दिल्ली में थे, उनसे इस अमेरिका तो लोगों का स्वागत करने वाला देश है।

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ये और बात है कि बाद में उनके इस बयान को अमेरिके विदेश विभाग ने अपने ट्वीटर से डिलीट कर दिया है।Because every country in the world has stupid people. I'm sure there are stupid people here, there are stupid people in the United States that make dumb comments all the time. I don't know what else to tell you other than the United States is a very welcoming country. Our nation has been enriched by people who come to our country, who come from our country, from all over the world, have become Americans, have assimilated into our way of life and have contributed greatly. So, that's all I can comment on that. रूबियों ने इस बात को अन्देखा कर दिया कि नफरत ओनलाइन चलाई तो जाती है लेकिन उसका असर ओफलाइन समाज पर भी होता है जैसे भारत ने मुसल्मानों के प्रती ओनलाइन ही नफरत चलाई गई और अब हर दिन कहीं न कहीं से ऐसी घटना आ जाती है ओफलाइन � अमेरिका में भार्तियों की मौजूदगी को इस तरह से दिखाया जाने लगा है।एक पॉड़कास्ट में अमेरिकी इंटेविवर टेक्सेस के स्टेट सिनेटर से कह रहे हैं कि भार्तिय टेक्सेस में अपना जातिवात मूर्ती पूजा लेकर आ गए हैं।टेक्सेस के फ्रि जवाब में ट्रम्प की पार्टी के स्टेट सिनेटर मेज मिडल्टन कह रहे हैं हमें H1B वीजा सिस्टम खत्म करने की ज़रूरत है ताकि हम टेक्सस और अमेरिका के लोगों को नौकरियों में प्रात्मिक्ता दे सकें।मैं बार बार यह सुनता हूं कि विदेशी वरकर नौक भारतिय समुदाय को भी अमेरिकी समुदाय से समवाद करने की जरूरत है।जो भ्रांतिया हैं दूर करनी चाहिए।

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उन्हें जिस बात का बुरा लग रहा है उसे भी समझना चाहिए।जैसे इसमार पस्चिम बंगाल के मुसल्मानों ने साफ साफ कह दिया हम गाय नहीं ख�संगठन ने मांग शुरु कर दी गाय को राष्ट्रिय मवेशी या माता का दरजा दिया जाना चाहिए।इसके पीछे यही सोच है कि बार बार गाय के नाम पर नफरत फैलाई जाती है एक समुदाय को टार्गेट किया � इस मुद्दे के कई पहलू हैं हम उनमें जाना नहीं चाहते हैं लेकिन मुसल्मानों के एक बड़े वर्ग को लगने लगा है कि अगर उनके खिलाब नफरत की बुनियाद में गाए है तो इसका यही एक तरीका है कि सरकार तुरंद गाए को राष्ट्रिय पशू का दर्जा द देखना चाहिए कि उनकी तरफ से ऐसी क्या बात हो गई जिसके कारण अमेरिका में मंदिर और मूर्टी पूजा को लेकर अब टार्गेट किया जाने लगा है।जबकि पूजा तो कई साल पहले से करते आ रहे हैं।हमेशा से करते रहे होंगे।

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तो H -1B वीजा हो या ग्रीन क बहत्रीन तरीके से क्वालिफाइड सालो काम करने वाले लोग वहाँ टैक्स देते हैं, बिना पर्मानेंट स्टेटस के रहते हैं और साट दिनों के नोटिस पर देश छोड़ना पड़ सकता है. भारतिय मूल के लोग अमेर्की आबादी का मात्र डेड़ प्रतिशत हैं, लेकि H -1B visa की fees बढ़ा कर एक लाग डॉलर कर दी गई, तब भी हंगामा मचा, मगर अमेरिका ने वापस ले लिया, अब ग्रीन कार्ड का मसला आ गया. Marko Rubio और S. Jai Shankar की press conference में स्वतंत्र पत्रकार कादंबिनी शर्मा ने रूबियो से सवाल कर दिया कि भारत के छात्रों, इंजिनयोगदान दिया है।लेकिन अब J -1 वीजा, F -1, H -1B वीजा में हो रहे बदलावों का दोनों देशों के लोगों के आपसी रिष्टों पर असर पढ़ रहा है।इस मामले में आपका प्रशासन भारतीय कादम्बणी के सवाल के जवाब में रूबियो कहते हैं कि मैं नहीं चाहता कि कोई भी अमेरिका की नीतियों में होने वाले बदलावों को भारत के खिलाग टार्गेटिंग के रूप में देखें या बदलाव गलोबल स्तर पर किये जा रहे हैं सभी देशों को लेकर हैं सिर्� इसमें सिर्भारत का हाथ नहीं है लेकिन दुनिया का कोई भी देश हो अमेरिका हो या भारत एक देश के रूप में आप जो भी करें उसमें आपको राष्ट्रहित का ध्यान देना होता है प्रमास की नीति भी उसी का हिस्सा है।

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इंडिया के लिए नहीं है, आपके लिए 20 मिलियों पर आपके लिए आपके लिए 20 मिलियों पर आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए आपके लिए

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उम्मीद है रूबीयो के इस बयान को आपने ध्यान से सुना होगा और अमेरिका के राष्ट्रहित के मसलों को भी समझा होगा. भारत अब अमेरिका में निवेश भी करने लगा है. खुद रूबीयो ने बताया कि भारत की कंपनीयों ने 20 अरब डॉलर निवेश करने का करार किया हैं साथ ही भारत सरकार अमेरिका से अगले 5 वर्षों में 500 बिलियंड डॉलर का आयाद करने वाली हैं भारत 500 बिलियंड डॉलर का आयाद करेगा अमेरिका से इसकी गोशना भारत नहीं भारत से पहले रूबियो करते हैं तब फिर ग्र कोलकता में लैंड करने वाले थे उनका दौरा शुरू होने से कुछी घंटे पहले ट्रम सरकार ने फैसला किया कि जो भी आयस्थाई स्टेटस पर अमेरिका में रह रहा है और ग्रीन कार्ड यानी स्थाई निवास के लिए अपलाई करना चाहता है उसे अपने देश लोड़क केबल अपवाद के तौर पर ऐसा करने की अनूमती दी जाएगी अब इसे लेकर भी उलजन बढ़ गई है कि अपवाद की कैटेगरी में कौन लोग आएंगे इसे लेकर कोई स्पश्टता नहीं दी गई सिर्फ इतनी जानकारी थी कि शरणार्थीयों को इस श्रेनी में रखा इस फैसले की निनदा होने लगी तब जाकर ट्रम प्रशासन ने कहा ग्रीन कार्ड के लिए अपलाई करने वाले सभी H1B वीजा होल्डर को सभी अमेरिका छोड़कर नहीं जाना होगा. Immigration Services के प्रवक्ता ने Newsweek से कहा कि बहुत से अपलिकेंट देश में रहते वे ग्रीन कार्�कर सकते हैं।जो लोग अपनी अप्लिकेशन में दिखा सकते हैं कि वे आर्थिक योगदान कर रहे हैं या उनका अमेरिका में रहना राष्ट हित्म में है वे मौजुदा प्रक्रिया के तहट अपलाई कर सकते हैं।क्या � कोई अमेरिका का नागरिक बनने के लिए आवेदन कर सकता है।अभी तक यह होता था कि आप जिस वीजा पर काम कर रहे हैं, करते रहे, मगर उसी के आधार पर अमेरिका में रहते वे ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन भर सकते हैं।अमेरिका में रहते वे अपने वर्तमान वी 1940 के Nationality Act और 1952 के Immigration and Nationality Act के तहट अमेरिका में वीजा पर काम करने वाले लोग Green Card की Application अमेरिका में रहते हुए ही दायर कर सकते थे।

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इस फैसले को इस साधार पर भी चेलेंज किया जाने लगा कि अपने देश जाकर अपलाई करने वालों को बहुत ही कम Green Card मिलता है।पिछले 10 सा 23 माई को नियमों में बदलाव करते हुए US Citizenship and Immigration Services के प्रवक्ता ने कहा था कि आसाधारन परिस्तितियों में ही अमेरिका में रहते हुए ग्रीन कार्ड के लिए अपलाई करने की अनुमती दी जाएगी. इस बदलाव से हमारी प्रवास की नीति लूप होल के बजाए कानून केहो जाता है जो चोरी छिपे अमेरिका में घुसना चाते हैं और application खारीज हो जाने के बाद भी अमेरिका में रहना चाते हैं. तो इस तरह से visa और green card की तलवार अचानक से लटकाती हैं. ट्रम्प ने एक जटके में अमेरिका में डस लाग भारतियों को चिंता में डाल दिया जो भार्कियों की चिंता ये भी है कि नए नियमों के कारण अमेरिका में नौकरी करना असंभव हो जाएगा. अपने देश में इंटरिव्यू देने जाएगे, उसका खर्चा लाखों में, अलग से परिवार को कितनी परिशानी होगी. अगर किसी ने वहाँ शादी कर ली है, तो � उन्होंने कहा कि इसके जरीय अमेरिका में काम करने वाले मेहनती प्रबासीयों को बाहर धखेला जा रहा है।कोई कह रहा है कि ये नीती हतियार की तरह इस्तेमाल की जा रही है।ट्रम की तारीफ करने वाले भी कम नहीं।इनका कहना है कि ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया म इस प्रक्रिया के कारण दुनिया का बेहतरीन टैलेंट अमेरिका आ पाता था अब आसानी से नहीं आ पाएगा।

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आपको यह याद है?

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ट्रम जब शपत ले रहे थे तब एस जैशंकर भी वहाँ मौझूद थे।अपने शपत ग्रहंड में ट्रम्प ने कहा था अवैद प्रव जाहिर है इस मुद्धे पर भारत हमेशा खुद को असमंजस की स्थिती में पाता है।ट्रम के एक साल के शासन में भारत से प्रवास करने वाले लिएसामाजिक रूप से प्रवासीयों को तिरसकार भी किया गया है वैद और अवैद में फर्क मिटता जा रहा है।क्या संकट के वक एनाराई भारत सरकार को अपने साथ खड़ा पाते हैं।इसका जबाब वही दे सकते हैं।

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टेक्सेस में मोधी और ट्रम्क का कितना बड़ा कारिकरम हुआ।जब भी प्रधान मंत्री मोधी अमेरिका गए क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी अब की हालत पर कोई भरोसा देने वाला बयान दे सकते हैं?दिया भी हो तो बताईएगा. क्या प्रधानमंत्री मोदी अब वहां के किसी स्टेडियम में भाशन देंगे कि वीजा और ग्रीन कार्ड से डरना नहीं है?या फिर भार एक शांदार देश है उस देश की विवस्था सभी के लिए रही है किसी भी देश के लोगों के लिए कोई भी कहीं से अकेला जाकर वहाँ तरक्की कर सकता है दॉलत कमा सकता है खूब सारी जमीने खरीच सकता है मकान खरीच सकता है वहाँ पर कोई भी आपके मकान पर आपकी जबसने का सपना देखते हैं कि बड़े होकर इंजेनियर बनने के बाद अमेरिका जाएंगे इतना प्यारा देश है अमेरिका जो वहाँ गए आने का नाम नहीं लेते हैं इसकी वजह है अमेरिका का सवाल है क्या इस बदलाव को टाला जा सकता है?क्या भारत में घुस्पैट के नाम पर भारत के लोगों को टारगेट करना बंध हो सकता है?

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बंगाल और टेकसस दोनों को इस सवाल का सामना करना चाहिए. नतीजा सब को मालुम है. नमस्कार मैं रवीश कुमार

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