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धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा क्यों देना पड़ा? (BBC Hindi)

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उनके स्तीफे काज की जो भाषा है जो नोने दिया है जो नोने स्कुत जारी की सोशल मीडिया पर उसकी हर लाइन में लगता है कि एक टीस है वो टीस यह है कि वो स्तीफा नहीं देना चाते थे लेकिन वो स्तीफा दे रहे हैं अब स्तीफे के पीछे ये सारी जो वजए हैं उनको मैं आपको गिनाता हूँ. पहली बात ये कि 2014 के बाद से जिस नरेंदर मोदी सरकार के वो एक बड़े मंतरी है और ना सिर्फ मंतरी है बल्कि वो भारती जंता पार्टी के संगठन में एक बड़ी भूमिका निभाते रहे हैं. कई राज्यों के चुनावों और ये बहुत बड़ा जटका इसले भी था क्योंकि उनके सीधे स्तीफे की मांग हो रही थी जिसको शायद personality को जब assessment करते हैं तो कहते हैं कि साभ एक acceptance की problem होती है कि साभ हम से शायद हम तो गलत नहीं कर रहे हैं तो वो एक issue था दूसरा issue यह है कि धर्मेंज़ प्रधान जो न� जो नई भारती जंता पार्टी है पिछले 10 -12 -15 साल से प्राइमनिस्टर नरेंदर मोदी और अमिश शाह खासतोर से जिस संगतन की इंचार्ज रहे हैं उसके एक बहुत इंपोर्टंट क्लॉग हैं इंदवील बहुत इंपोर्टंट बिंदु रहें उसको देखते हुए ये पहला ऐसा इस्तीफा है जो पिछले कई सालों में लगातार हो रही मांगों के बाद हुआ है अभी तक कोई इस्तीफे नहीं हुए है हमने SIR पर प्रोटेस्ट देखा है हमने NRC, CAA पर बड़ा प्रोटेस्ट देखा है शाहीन बाग से लेके पार्क सरक उसके बाद भी हमने नोडबंदी का दोर देखा है और बहुसी चीज़े देखी हैं ये पहला बड़ा अस्तीफा है तो ये अस्तीफा इसले भी important था क्योंकि अब सरकार को ये समझ में आ रहा था कि ये जो movement है ये जो प्रदर्शन है ये शायद

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उस तपके के आगे का है जो उनका वोटर रहा है इसको समझने की जरूत है कि जो सरकार को पिछले 2 -3 चुनावों में आम चुनावों में वोट दे कर ला रहे थे ये उसके आगे का प्रोटेस्ट हो रहा था ये वो जेनजी है जो जेनजी शायद 10 -20 -15 सालों के पहले जेपी आंदरन हुआ है बहुत से आंदरन हुआ है हम सब �

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